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क्यों माधवदास जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने मुख में रखा निवाला खिलाया अद्भुत लीला

 जय श्री राधे भक्तों आज के इस पोस्ट में हम आपको वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत श्री माधव दास जी महाराज की एक अद्भुत घटना के बारे में बताएंगे जिनमें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने उनके साथ लीला की है तो दोस्तों इस लीला को जानने के लिए इस पोस्ट को आखिर तक अवश्य पढ़े जय श्री राधे

एक बार की बात है वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत श्री माधव दास जी महाराज जो कि बड़े ही अद्भुत और सरल महात्मा थे वह अकेले लता कुंज में रहते और दिन भर राधा कृष्ण राधा कृष्ण का नाम जप करते और आंसू बहाते कुछ भक्त बाबा को कुटिया में रहने के लिए कहते तो बाबा कहते क्या करना है कुटिया का भजन करना है तो कुंज में करना है और भोजन प्रसाद के लिए माधव दास जी महाराज जब वृंदावन के सभी संतजन भोजन करके उठते उनके झूठे पत्तल में कुछ भोजन बचता उस भोजन को भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाकर स्वयं ग्रहण करते थे

देखो क्या है इन दिव्य और सरल संत की अद्भुत रीति संतो के जूठन से भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाते हैं और उसी जूठन का भोग लगा हुआ स्वयं पाते हैं यही नियम वह प्रतिदिन करते एक दिन वह जल्दी जल्दी में संतों की जूठन को भगवान को भोग लगाना भूल गए और जूठन का प्रसाद सीधा ही अपने मुख में रख लिया जैसे ही प्रसाद को मुख में रखा उनको याद आया कि भगवान को तो भोग ही नहीं लगाया है 

अब उनके सामने एक बहुत ही बड़ी दुविधा प्रगट हो गई भगवान को बिना भोग लगाए प्रसाद को निगले कैसे और संतों के जूठन प्रसाद को उगले कैसे बिना भगवान को प्रसाद लगाएं प्रसाद पाना घोर पाप होगा और संतों के प्रसाद को उगल कर उनका अपमान करना महापाप होगा इसी दुविधा में वह प्रसाद का निवाला अपने मुख में रखे हुए बैठे रहे धीरे-धीरे समय बीतता गया सुबह से दोपहर हो गई दोपहर से रात्रि हो गई और वह दिव्य संत निवाला मुख में ही रख कर आंसू बहाने लगे  

ऐसे ही रात बीत गई अगली सुबह भगवान स्वयं उनके सामने प्रगट हो गए और भगवान श्री कृष्ण उनसे बोलते हैं ( माधव पास तुम्हारे आयो तन में उठी भूख की पीड़ा तीर तीर धरी धायों मैया ने दही दिनों मेरे मन नहीं भयो माधव पास तुम्हारे आयो ) माधव दास कल से भूखा हूं मैया ने दही माखन दिया मुझे नहीं भाया तब माधव दास जी बोले हे प्रभु भोजन प्रसाद ग्रास मुंह में है निगलूं तो आपको भोग नहीं लगाया उगलू तो संतो के जूठन प्रसाद का अपमान होगा तब भगवान श्रीकृष्ण बोले बस इतनी सी बात जरा सी बात के लिए कितने हैरान हो हो गये मुझे भी भूखा रखा और खुद भी भूखे हो 

अब ऐसा करो मुख में जो जूठन प्रसाद है उसका थोड़ा सा टुकड़ा तोड़ कर मुझे खिला दो भोग भी लग जाएगा और संतो के जूठन प्रसाद का अपमान भी नहीं होगा तब माधव दास जी कांप कर बोले आपको अपना झूठा खिला दू आपको तभी भगवान श्री कृष्ण हंसकर बोले अरे यार रोज कितनों का जूठा खिलाते थे आज अपना ही झूठा खिला दोगे तो क्या फर्क पड़ेगा और क्या बिगड़ जाएगा 

तब माधव दास जी बोले ऐसा नहीं ऐसा नहीं करूंगा मैं और तब भगवान श्री कृष्ण अपना सिर नीचे करे हुए और माधव दास जी सिर ऊपर ( माधव मगन भये मन में जब माधव ने समझायो शीश गिरो जो दीनबंधु ने बीन बीन के खायो माधव पास तुम्हारे आयो) और भगवान ने माधव दास जी को समझाया पर माधव दास जी नहीं माने तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे छीना झपटी करने लगे और उनके मुख्य में जो प्रसाद रखा हुआ था उसके कुछ टुकड़े जमीन पर गिर गए और भगवान श्री कृष्ण ने शीघ्रता करते हुए उन टुकड़ों को खा लिया और अपने भक्तों को घोर पाप करने से बचा लिया

प्रिय भक्तों आशा करता हूं आपको आज का यह पोस्ट अच्छा लगा होगा मित्रों ऐसी ही कृष्ण प्रेम की कथा पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.laddugopalstore.com पर विजिट करते रहे अब आपसे विदा लेते हैं और अगली बार ऐसी ही एक दिव्य और सच्ची लीला लेकर आपके सामने हाजिर होंगे तब तक के लिए 

हरे कृष्णा 🙏

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